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पेट्रोलियम पदार्थ पर निर्भरता और वायु प्रदूषण घटाने की कवायद तेज, जल्द सड़कों पर दौड़ेगी हाइड्रोजन बसें

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय स्वच्छ ईंधन वाले वाहनों को बढ़ावा देने के लिए हाइड्रोजन सेल से संचालित वाहनों के सुरक्षा मूल्यांकन मानक पहले ही तैयार कर चुका है। 

केंद्र सरकार की वैकल्पिक ईंधन मिशन के तहत सार्वजनिक बसों को हाइड्रोजन से दौड़ाने की योजना है। इस बाबत पायलट प्रोजेक्ट के तहत जल्द ही कुछ चुनिंदा मार्गों पर हाइड्रोजन बसों का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। दरअसल, पेट्रोल-डीजल की आसमान छूती कीमतों, पेट्रोलियम पदार्थ के आयात के भारी खर्च और पर्यावरण को होने वाले नुकसान के मद्देनजर हाइड्रोजन ईंधन सरकार के स्वच्छ ऊर्जा मिशन की प्राथमिकता में है।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय स्वच्छ ईंधन वाले वाहनों को बढ़ावा देने के लिए हाइड्रोजन सेल से संचालित वाहनों के सुरक्षा मूल्यांकन मानक पहले ही तैयार कर चुका है।
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारत पेट्रोलियम पदार्थों पर निर्भरता घटाने के लिए सीएनजी, एचसीएनजी, एलपीजी, बायोफ्यूल को ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने पर जोर दे रहा है।

नए वित्त वर्ष में दिल्ली-जयपुर और दिल्ली-चडीगढ़ मार्ग पर हाइड्रोजन बसें चलाने की तैयारियां जोरों पर हैं।
अधिकारी के मुताबिक स्वच्छ ईंधन की दिशा में अमेरिका, कनाडा, ब्राजील, दक्षिण कोरिया जैसे देश आगे बढ़ रहे हैं। विकसित देशों में हाइड्रोजन को बतौर ईंधन प्रयोग में लाने के लिए कई दौर के परीक्षण हो चुके हैं। जर्मनी में हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली बसें काफी समय से दौड़ रही हैं। ऐसे में सरकार राज्यों की सार्वजनिक बसों को इलेक्ट्रिक, बायो-सीएनजी और हाइड्रोजन ईंधन पर शिफ्ट करने की योजना पर काम कर रही है।

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