वैक्सीन को लेकर पूरी दुनिया में भारत का डंका, देश में अभी सात और कोरोना टीकों पर चल रहा काम

दिल्ली।भारत में अब टीकाकरण के जरिए कोरोना वायरस के खिलाफ जंग जारी है। देश में फिलहाल, दो वैक्सीन- कोविशील्ड और कोवैक्सीन से टीकाकरण अभियान तेज गति से जारी है। सिर्फ देश ही नहीं, बल्कि भारत की मदद से कई देशों में इन टीकों के जरिए टीकाकरण हो रहा है।

भारत ने संकट काल में जिस तरह से पड़ोसी देशों और गरीब देशों की वैक्सीन देकर मदद की है, इसकी वजह से पूरी दुनिया में भारत की जयजयकार हो रही है। हालांकि, भारत का पूरी दुनिया में और डंका तब बजेगा, जब सात और वैक्सीन बनकर तैयार हो जाएंगी। दरअसल, भारत में अभी सात और नए टीकों पर काम हो रहा है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने शनिवार को कहा कि देश कोरोना के सात और नए टीके विकसित कर रहा है। सभी लोगों को टीका लगाने की दिशा में काम जारी है। उन्होंने कहा कि टीके को खुले बाजार में उतारने की केंद्र सरकार की फिलहाल कोई योजना नहीं है, इसका फैसला परिस्थिति के अनुसार किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को कोविड-19 का टीका लगाने का काम मार्च से शुरू होगा। उन्होंने कहा-हम सिर्फ दो टीकों पर निर्भर नहीं हैं, क्योंकि देश सात और स्वदेशी टीके विकसित करने पर काम कर रहा है, भारत विशाल देश है और सभी तक पहुंचने के लिए हमें और अनुसंधान की जरूरत है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सात नए टीकों में से तीन टीके परीक्षण के चरण में, दो टीके प्री-क्लिनिकल चरण में, एक फेज-1 और एक अन्य फेज-2 के परीक्षण के चरण में है। उन्होंने कहा कि फिलहाल कोरोना टीका आपात स्थिति के आधार पर लगाया जा रहा है, पूरी निगरानी तथा नियंत्रित तरीके से टीकाकरण किया जा रहा है। मंत्री के मुताबिक अगर टीके को खुले बाजार में उतार दिया जाए तो उनपर कोई नियंत्रण नहीं रह जाएगा।

वहीं, भारत में आम जनता के लिए कोरोना वायरस की वैक्सीन आधे मार्च के बाद किसी भी समय उपलब्ध हो सकती है। हर्षवर्धन ने संसद में बताया कि इस चरण में 50 साल से अधिक वायु वाले लोग शामिल होंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि 50 साल से अधिक आयु वर्ग वालों को कोरोना वायरस का ज्यादा खतरा रहता है।

बता दें कि भारत में कोरोना वायरस वैक्सीनेशन की शुरुआत इस साल 16 जनवरी को हुई थी। तब से लेकर फरवरी के पहले सप्ताह तक स्वास्थ्य कर्मी, पुलिस और फ्रंट लाइन वर्करों को वैक्सीन लगाई जा रही है। स्वास्थ्य मंत्री ने संसद में बताया कि वैक्सीनेशन के पहले चरण में सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों के लगभग एक करोड़ स्वास्थ्य कर्मियों के टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया था, जो कि काफी तेजी से आगे भी बढ़ रहा है।

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