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सरकार और किसानों के बीच दो फरवरी को फिर होगी बातचीत, प्रदर्शन स्थल पर सुरक्षा मजबूत

किसान लगातार कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग पर अड़े हुए हैं। इस दौरान सार्वजनिक सुरक्षा को बनाए रखने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 29 जनवरी की रात 11 बजे से 31 जनवरी की 11 बजे तक तीन सीमाओं और उनके आस-पास के क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाओं को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है।

केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि कानूनों के खिलाफ सिंघू बॉर्डर पर किसानों का प्रदर्शन 67वें दिन में प्रवेश कर गया है। प्रशासन ने सिंघू बॉर्डर (दिल्ली-हरियाणा सीमा) पर भारी सुरक्षा के इंतजाम किए हैं। वहीं, गतिरोध को कम करने के लिए किसानों और केंद्र के बीच अगले दौर की बातचीत 2 फरवरी को तय है। दूसरी तरफ गाजीपुर बॉर्डर (दिल्ली-उत्तर प्रदेश सीमा) पर किसानों के विरोध प्रदर्शन का आज 65वां दिन है। पिछले दिनों बने हालात के बाद विरोध स्थल पर किसानों के आने की संख्या बढ़ गई है, जिसको देखते हुए सुरक्षा को बढ़ा दिया गया है।

किसान लगातार कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग पर अड़े हुए हैं। इस दौरान सार्वजनिक सुरक्षा को बनाए रखने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 29 जनवरी की रात 11 बजे से 31 जनवरी की 11 बजे तक तीन सीमाओं और उनके आस-पास के क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाओं को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। वहीं, दिल्ली पुलिस ने एहतियातन एनएच-24 को बंद कर दिया है।

शनिवार को विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उनकी सरकार प्रदर्शनकारी किसानों की ओर से उठाए गए मुद्दों का बातचीत के जरिए समाधान निकालने का निरंतर प्रयास कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, संसद में विभिन्न दलों के नेताओं की डिजिटल बैठक में पीएम मोदी ने यह भी कहा कि तीन कृषि कानूनों को लेकर केंद्र सरकार ने जो प्रस्ताव दिया था वो आज भी बरकरार है।

इस बैठक में प्रधानमंत्री ने नेताओं से कहा कि कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर प्रदर्शनकारी किसानों से सिर्फ एक फोन कॉल की दूरी पर हैं और तोमर ने इस महीने की शुरुआत में किसान नेताओं को इस बात से अवगत भी कराया था। इस बैठक में राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद, लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के नेता सुदीप बंदोपाध्याय, शिरोमणि अकाली दल के नेता बलविंदर सिंह भूंदड़, शिवसेना के विनायक राउत और कई अन्य नेता शामिल हुए।

बता दें कि गणतंत्र दिवस पर किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान राष्ट्रीय राजधानी के विभिन्न हिस्सों में हुई हिंसा के बाद सरकार और किसानों के बीच कृषि कानूनों का विरोध करते हुए तनाव बढ़ गया है। गणतंत्र दिवस पर प्रदर्शनकारियों ने पहले से तय मार्ग का पालन नहीं किया और दिल्ली में प्रवेश करने के लिए बैरिकेड्स को तोड़ दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के जवानों के साथ जमकर मारपीट की। इसके अलावा उन्होंने लाल किले में घुसकर धार्मिक झंडा भी लगाया।

 

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